यह मेरी अपनी जिंदगी की वह सच्ची कहानी है जिसे मैं आज तक किसी को नहीं बताया, लेकिन अब लगता है कि इसे कागज पर उतार देना चाहिए। मेरा नाम राहुल है और मैं राजस्थान के जयपुर शहर में रहता हूँ। मेरी पत्नी का नाम माधवी है और उसकी उम्र 27 साल है। हमारी शादी को तीन साल हो चुके हैं और हमारे घर में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। मैं एक बैंक में क्लर्क हूँ और माधवी हाउसवाइफ है। हमारे घर के ठीक बगल में सेठ जमनादास जी रहते हैं, जो उम्र में 55 साल के हैं और शहर के सबसे अमीर व्यापारियों में से एक माने जाते हैं। उनका बड़ा सा बंगला है, कई गाड़ियां हैं और हीरे-जवाहरात का बड़ा कारोबार है। शुरू से ही मुझे अपनी पत्नी पर थोड़ा शक रहता था क्योंकि माधवी बहुत खूबसूरत है और उसका शरीर ऐसा है कि कोई भी मर्द उसे देखकर रुक जाए। लंबी कद, गोरा रंग, भरे हुए स्तन, पतली कमर और चौड़े कूल्हे — वह सच में किसी अप्सरा जैसी है। लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि सेठ जी की नीयत इतनी खराब होगी और वे मेरी पत्नी को गहनों के लालच में फंसाकर उसका शोषण करेंगे।
अन्तर्वासना एक ऐसी भावना है जो कभी-कभी इंसान को अंधा कर देती है। माधवी को गहनों का बहुत शौक था और सेठ जी यह बात अच्छी तरह से जानते थे। वे अक्सर हमारे घर आते-जाते रहते थे और माधवी से बातें करते थे। मुझे यह सब देखकर थोड़ी ईर्ष्या होती थी, लेकिन मैं कुछ कह नहीं पाता था क्योंकि सेठ जी हमारे पड़ोसी भी थे और हमारे घर के मददगार भी। एक दिन मैं ऑफिस गया हुआ था और माधवी अकेली घर में थी। तभी सेठ जी अपने हाथों में एक सोने का हार लेकर हमारे घर आए और माधवी को दिखाने लगे। वे बोले — |बहू जी, यह हार मैंने खास तुम्हारे लिए बनवाया है। इसे पहनकर तुम और भी सुंदर लगोगी।| माधवी पहले तो झिझकी, लेकिन गहने का लालच उसे खींच ले गया। उसने हार पहन लिया और आईने में खुद को देखने लगी। सेठ जी उसके पीछे खड़े होकर उसे देख रहे थे और उनकी नजरें उसके शरीर पर घूम रही थीं।
धीरे-धीरे सेठ जी ने अपनी चालें शुरू कर दीं। वे माधवी के करीब आ गए और उसके कंधे पर हाथ रख दिया। माधवी ने हल्का सा झटका दिया लेकिन सेठ जी ने उसे रोक लिया। उन्होंने कहा — |माधवी, तुम्हें पता है कि मैं तुम्हें कितना पसंद करता हूँ? मैं तुम्हें हर वह चीज दे सकता हूँ जिसकी तुमने कभी कल्पना की हो। बस तुम मेरी बात मान लो।| माधवी ने कहा — |सेठ जी, आप मेरे पिता जी की उम्र के हैं। यह ठीक नहीं है। मेरे पति को पता चल जाएगा तो बहुत बवाल होगा।| लेकिन सेठ जी हंसे और बोले — |तुम्हारे पति को क्या पता चलेगा? वह तो दिनभर ऑफिस में रहता है। और फिर तुम्हें ऐसे गहने और कौन देगा? सोचो…|
माधवी कुछ देर तक चुप रही। उसके मन में गहनों का लालच और अपने पति के प्रति वफादारी के बीच जंग चल रही थी। लेकिन सेठ जी ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींच लिया। उन्होंने उसकी गर्दन पर होंठ रख दिए और चूमने लगे। माधवी ने पहले तो मना किया, लेकिन जब सेठ जी ने उसके कान में फुसफुसाकर कहा कि वे उसे एक हीरों की अंगूठी और मोतियों का हार भी देंगे, तो वह पिघल गई। उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और सेठ जी को अपने शरीर से चिपकने दिया। सेठ जी ने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और उसकी छातियों पर हाथ रख दिया। वे उन्हें दबाने लगे और माधवी के मुंह से धीमी सी आह निकल गई — आह्ह्ह… सेठ जी… धीरे…
सेठ जी ने माधवी को बेडरूम में ले जाने का फैसला किया। उन्होंने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ ले गए। माधवी के कदम डगमगा रहे थे लेकिन वह रुकी नहीं। बेडरूम में पहुंचकर सेठ जी ने दरवाजा बंद कर दिया और माधवी को गले लगा लिया। उन्होंने उसके होंठों को चूमना शुरू किया और अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी। माधवी ने भी उनका साथ दिया और दोनों की जीभें आपस में लिपट गईं। सेठ जी ने उसकी साड़ी खोलनी शुरू की और एक-एक करके उसके कपड़े उतारने लगे। माधवी ने भी सेठ जी की शर्ट के बटन खोल दिए और उनका सीना सहलाने लगी।
कुछ ही देर में दोनों पूरी तरह से नंगे हो गए। सेठ जी का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और वह माधवी की चूत के सामने तना हुआ था। माधवी ने उसे देखकर अपनी आंखें बंद कर लीं क्योंकि वह अपने पति के लंड से कहीं ज्यादा बड़ा और मोटा था। सेठ जी ने माधवी को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत को अपनी उंगलियों से सहलाने लगे। माधवी की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी और उसमें से रस बह रहा था। सेठ जी ने अपनी उंगलियां उसकी चूत के अंदर डालीं और उन्हें अंदर-बाहर करने लगे। माधवी जोर से चीखी — आआह्ह्ह… सेठ जी… उह्ह्ह्ह… और अंदर… मेरी चूत में और उंगलियां डालो…
सेठ जी ने माधवी की चूत को अपने मुंह से चूसना शुरू किया। उन्होंने अपनी जीभ से उसके भगशेफ को सहलाया और उसकी चूत के अंदर तक जीभ डाल दी। माधवी की कमर ऊपर उठ गई और उसने सेठ जी के बाल पकड़ लिए। वह बार-बार कह रही थी — |हाँ सेठ जी… ऐसे ही… मेरी चूत चाटो… मुझे बहुत मजा आ रहा है…| सेठ जी ने उसकी चूत को चाटते हुए उसकी गांड में भी अपनी उंगली डाल दी। माधवी की आंखें खुली की खुली रह गईं और उसके मुंह से एक तेज चीख निकली — आआअह्ह्ह्हह… सेठ जी… वहां मत… मैंने वहां कभी नहीं…
लेकिन सेठ जी ने उसकी बात नहीं मानी। उन्होंने अपनी उंगली को उसकी गांड में और अंदर कर दिया और उसे अंदर-बाहर करने लगे। माधवी का शरीर कांपने लगा और उसकी चूत से रस की धारा बह निकली। सेठ जी ने अपनी उंगली निकाली और अपना लंड माधवी की चूत के मुंह पर रख दिया। उन्होंने धीरे से उसे अंदर डालना शुरू किया। माधवी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपने होंठ काट लिए। सेठ जी का मोटा लंड उसकी चूत में धीरे-धीरे अंदर जा रहा था और वह दर्द और मजे का अजीब सा मिश्रण महसूस कर रही थी। जैसे ही पूरा लंड अंदर चला गया, सेठ जी ने धक्के मारने शुरू कर दिए। माधवी की चूत उनके लंड को कसकर पकड़ रही थी और हर धक्के के साथ वह जोर से चीख रही थी — आआह्ह्ह… सेठ जी… आपका लंड बहुत बड़ा है… मेरी चूत फट रही है…
सेठ जी ने माधवी को करवट लेटा दिया और उसकी एक टांग उठाकर अपने कंधे पर रख ली। इस पोजीशन में उनका लंड और गहराई तक उसकी चूत में जा रहा था। वे जोर-जोर से धक्के मार रहे थे और माधवी की चूत से चट-चट की आवाजें आ रही थीं। माधवी बार-बार कह रही थी — |हाँ सेठ जी… और तेज… मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी हो गई हूँ…| सेठ जी ने उसके बाल पकड़कर उसका सिर पीछे की तरफ खींचा और उसकी गर्दन पर होंठ रख दिए। माधवी की चूत अब पूरी तरह से खुल चुकी थी और सेठ जी का लंड उसमें आराम से आ-जा रहा था।
कुछ देर बाद सेठ जी ने माधवी को घोड़ी की तरह झुका दिया। उसने अपने दोनों हाथ बिस्तर पर टिका दिए और अपनी गांड ऊपर उठा ली। सेठ जी उसके पीछे खड़े हो गए और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। इस पोजीशन में वे और जोर से धक्के मार सकते थे और माधवी की गांड उनके धक्कों से हिल रही थी। सेठ जी ने अपनी उंगलियां माधवी की गांड में डाल दीं और उसे दोनों जगह से चोदने लगे। माधवी की चीखें पूरे कमरे में गूंज रही थीं — आआअह्ह्ह्हह… सेठ जी… मेरी गांड में भी… मुझे दोनों जगह से चोदो… मैं बर्दाश्त कर लूंगी…
सेठ जी ने माधवी की गांड में अपना लंड डालने की कोशिश की। माधवी पहले तो चीखी लेकिन फिर उसने खुद को ढीला कर लिया और सेठ जी का लंड उसकी गांड में धीरे-धीरे अंदर चला गया। माधवी का शरीर पसीने से भीग चुका था और उसके मुंह से लगातार आहें निकल रही थीं। सेठ जी ने उसकी गांड में जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। माधवी का शरीर झूल रहा था और उसकी छातियाँ बिस्तर पर रगड़ खा रही थीं। सेठ जी ने उसकी चूत में भी अपनी उंगलियां डाल दीं और उसे दोनों जगह से चोदने लगे। माधवी अब पूरी तरह से चुदक्कड़ हो चुकी थी और वह बार-बार कह रही थी — |मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी रखैल हूँ… मेरी चूत और गांड दोनों तुम्हारी हैं…
सेठ जी ने माधवी को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं। उन्होंने अपना लंड उसकी चूत में डाला और पूरी ताकत से चोदने लगे। माधवी की चूत अब लाल हो चुकी थी और उसमें से झाग निकल रहा था। सेठ जी बार-बार अपना लंड बाहर निकालते और फिर से अंदर डाल देते। माधवी हर बार जोर से चीखती — आआह्ह्ह… सेठ जी… मेरी चूत को मत छोड़ो… मुझे और चोदो…| सेठ जी ने उसकी छातियों को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें चूसने लगे। माधवी की छातियों से दूध जैसा रस निकल रहा था जो सेठ जी पी रहे थे।
सेठ जी ने माधवी को अपनी गोद में उठा लिया और खड़े-खड़े उसे चोदने लगे। माधवी की टांगें सेठ जी की कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं और उसके हाथ उनके गले में थे। सेठ जी उसे उछाल-उछाल कर चोद रहे थे और माधवी हर बार जोर से चीख रही थी। उसकी चूत से रस टपक रहा था और सेठ जी के लंड पर फैल रहा था। सेठ जी ने उसे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उसकी टांगें अपनी कमर पर लपेटकर उसे और जोर से चोदने लगे। माधवी की आवाज अब बैठ चुकी थी लेकिन वह फिर भी चिल्ला रही थी — |हाँ… और… मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी चुदवाती रहूंगी…
सेठ जी ने माधवी को वापस बिस्तर पर लिटाया और उसकी गांड में अपना लंड डाल दिया। इस बार वे और जोर से धक्के मार रहे थे और माधवी की गांड से खून की हल्की धारा भी निकल आई। लेकिन माधवी को दर्द नहीं हो रहा था, उल्टा उसे और मजा आ रहा था। वह बार-बार कह रही थी — |मेरी गांड चोदो… मेरी गांड में लंड डालो… मैं तुम्हारी चुदक्कड़ हूँ…| सेठ जी ने उसकी गांड में अपना पूरा लंड अंदर तक डाल दिया और उसे अंदर-बाहर करने लगे। माधवी का शरीर अब पूरी तरह से टूट चुका था लेकिन वह रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
करीब एक घंटे तक सेठ जी माधवी को अलग-अलग तरीकों से चोदते रहे। उन्होंने उसे कई बार चरम सुख तक पहुंचाया और माधवी भी हर बार उनके साथ झड़ती रही। आखिरकार सेठ जी ने माधवी की चूत में अपना वीर्य डाल दिया और उसके अंदर ही लेट गए। माधवी ने अपनी टांगें उनकी कमर पर कसकर लपेट लीं ताकि एक भी बूंद बाहर न निकले। दोनों काफी देर तक एक दूसरे से चिपके रहे और एक दूसरे की सांसें महसूस करते रहे।
शाम को जब मैं ऑफिस से लौटा तो माधवी ने मुझे चाय बनाकर दी। उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी और वह बार-बार मुस्कुरा रही थी। मैंने पूछा — |आज क्या खास बात है? तुम तो बहुत खुश लग रही हो।| माधवी ने कहा — |कुछ नहीं, बस आज सेठ जी आए थे और उन्होंने मुझे एक सोने का हार दिया है।| मैंने कहा — |अच्छा, तो यह बात है। लेकिन सेठ जी इतने मेहरबान क्यों हो रहे हैं?| माधवी ने कहा — |वे तो हमारे पड़ोसी हैं और हमारे घर के मददगार भी। उन्होंने कहा कि वे मुझे बेटी की तरह मानते हैं।| मैं कुछ नहीं बोला लेकिन मेरे मन में शक का कीड़ा जरूर पैदा हो गया था।
अगले कुछ दिनों में सेठ जी का हमारे घर आना-जाना और बढ़ गया। वे अक्सर माधवी को गहने और कपड़े लाकर देते थे और माधवी भी उनसे खुलकर बातें करने लगी थी। मैंने एक दिन माधवी से पूछा — |तुम सेठ जी के साथ इतना समय क्यों बिताती हो?| माधवी ने कहा — |अरे, वे तो हमारे लिए बाप जैसे हैं। तुम इतना शक क्यों करते हो?| मैंने कहा — |मुझे ठीक नहीं लगता। तुम उनसे दूर रहा करो।| माधवी ने नाराज होकर कहा — |तुम मुझ पर शक करते हो? मैं तुम्हारी पत्नी हूँ और तुम्हें मुझ पर भरोसा होना चाहिए।| यह कहकर वह कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।
लेकिन मेरे मन में शक और गहरा हो गया। मैंने एक दिन ऑफिस से जल्दी आने का फैसला किया। जब मैं घर पहुंचा तो देखा कि दरवाजा अंदर से बंद था। मैंने दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मैंने खिड़की से झांका तो अंदर का नजारा देखकर मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं। माधवी और सेठ जी बेडरूम में थे और दोनों पूरी तरह से नंगे थे। सेठ जी माधवी को चोद रहे थे और माधवी उनके नीचे दबी हुई थी। मैंने अपनी आंखों पर यकीन नहीं किया। मेरी पत्नी मेरे ही घर में मेरे पड़ोसी सेठ के साथ चुदाई कर रही थी। मेरा खून उबल गया लेकिन मैं कुछ नहीं कर सका। मैं वहीं खिड़की के बाहर खड़ा रहा और उन्हें देखता रहा।
सेठ जी ने माधवी को घोड़ी की तरह झुकाया और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। माधवी जोर-जोर से चीख रही थी — आआह्ह्ह… सेठ जी… और जोर से… मेरी चूत में और लंड डालो… मैं तुम्हारी चुदवाती रहूंगी… सेठ जी ने उसके बाल पकड़कर उसका सिर पीछे खींचा और उसकी गर्दन पर होंठ रख दिए। माधवी का शरीर पसीने से भीग चुका था और उसकी छातियाँ हिल रही थीं। मैंने देखा कि सेठ जी का लंड कितना मोटा और लंबा था और वह माधवी की चूत में पूरी तरह से समा गया था। माधवी बार-बार कह रही थी — |मेरी चूत चोदो… मेरी गांड में भी लंड डालो… मैं तुम्हारी रखैल हूँ…
सेठ जी ने माधवी की गांड में भी अपना लंड डाल दिया और उसे दोनों जगह से चोदने लगे। माधवी की चीखें पूरे घर में गूंज रही थीं। मैं यह सब देखकर अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। मेरा लंड भी मेरी पैंट में तनकर खड़ा हो गया था। मुझे गुस्सा भी आ रहा था और उत्तेजना भी हो रही थी। मैंने सोचा कि मैं अंदर जाकर उन्हें पकड़ लूं लेकिन मेरे पैर मुझे वहीं रोक रहे थे। मैं देखता रहा कि कैसे सेठ जी मेरी पत्नी को अलग-अलग पोजीशन में चोद रहे थे। उन्होंने माधवी को बिस्तर पर लिटाया, उसकी टांगें उठाईं, उसे करवट लिटाया, उसे गोद में उठाया और हर तरीके से उसकी चुदाई की। माधवी हर बार जोर से चीख रही थी और अपने पति को भूलकर सेठ जी के साथ पूरी तरह से समर्पित हो चुकी थी।
आखिरकार सेठ जी ने माधवी की चूत में अपना वीर्य डाल दिया और उसके ऊपर गिर पड़े। दोनों काफी देर तक एक दूसरे से चिपके रहे। मैं वहां से खिसक गया और सोचने लगा कि मैं क्या करूं। मैं ऑफिस से लौटने का नाटक करके घर पहुंचा। माधवी ने दरवाजा खोला और मुझे देखकर मुस्कुराई। उसके चेहरे पर पसीने की बूंदें थीं और उसके बाल बिखरे हुए थे। मैंने कहा — |आज तुम थकी हुई लग रही हो। क्या हुआ?| माधवी ने कहा — |कुछ नहीं, बस घर का काम कर रही थी।| मैं कुछ नहीं बोला लेकिन मेरे मन में यह बात घर कर गई कि मेरी पत्नी मुझे धोखा दे रही है।
अगले दिन मैंने माधवी को पकड़ने का फैसला किया। मैंने ऑफिस से छुट्टी ली और घर पर ही रुका। जब सेठ जी आए और माधवी ने उन्हें अंदर बुलाया, तो मैं भी चुपके से उनके पीछे-पीछे गया। मैंने देखा कि सेठ जी ने माधवी को गले लगा लिया और उसके होंठों को चूमने लगे। माधवी ने भी उनका साथ दिया। मैंने अचानक दरवाजा खोला और अंदर चला गया। दोनों मुझे देखकर स्तब्ध रह गए। माधवी ने अपना मुंह छिपा लिया और सेठ जी अपनी जगह से हिल नहीं पाए। मैंने कहा — |तो यह था तुम्हारा गहनों का बहाना? तुम मेरी पत्नी को गहनों के लालच में फंसाकर उसका शोषण कर रहे हो?|
सेठ जी ने हिम्मत जुटाई और कहा — |राहुल, तुम गलत समझ रहे हो। मैं तुम्हारी पत्नी को बेटी की तरह मानता हूँ।| मैंने कहा — |बेटी की तरह? और बेटी की तरह उसके साथ चुदाई करते हो?| माधवी फूट-फूटकर रोने लगी और बोली — |राहुल, मुझे माफ कर दो। मैंने गहनों के लालच में यह सब किया। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।| मैंने कहा — |तुम मुझसे प्यार करती हो? और मेरे पीठ पीछे इस बूढ़े सेठ के साथ सोती हो?|
सेठ जी ने कहा — |राहुल, तुम्हारी पत्नी ने यह सब अपनी मर्जी से किया है। मैंने उसे कभी मजबूर नहीं किया।| मैंने कहा — |तो क्या मैं तुम्हें माफ कर दूं?| माधवी ने मेरे पैर पकड़ लिए और बोली — |राहुल, मैं तुम्हें कभी धोखा नहीं दूंगी। बस यह आखिरी बार था। मुझे माफ कर दो।|
मैं कुछ देर तक सोचता रहा। मेरे अंदर गुस्सा और उत्तेजना दोनों थे। मैंने कहा — |ठीक है, मैं तुम्हें माफ कर दूंगा लेकिन एक शर्त पर।| माधवी ने पूछा — |क्या शर्त?| मैंने कहा — |अब से तुम सेठ जी के साथ मेरी मर्जी से सोओगी। और मैं भी तुम्हें उनके साथ देखूंगा।| माधवी और सेठ जी दोनों मेरी बात सुनकर हैरान रह गए। माधवी ने कहा — |राहुल, तुम क्या कह रहे हो?| मैंने कहा — |मैं साफ कह रहा हूँ। अब मैं तुम्हें सेठ जी के साथ सोने दूंगा लेकिन मेरी मर्जी से। और मैं भी तुम्हें उनके साथ देखूंगा।|
माधवी और सेठ जी दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर मुस्कुरा दिए। उस दिन के बाद हमारे बीच एक नया समझौता हो गया। अब सेठ जी हमारे घर आते हैं और मेरी मर्जी से माधवी के साथ सोते हैं। मैं भी वहां रहता हूँ और उन्हें देखता हूँ। कभी-कभी मैं भी उनके साथ शामिल हो जाता हूँ। माधवी अब पहले से भी ज्यादा खुश रहती है क्योंकि उसे गहने भी मिल रहे हैं और सेठ जी का लंड भी। मैंने भी अपनी अन्तर्वासना को स्वीकार कर लिया है और अब मुझे इसमें कोई बुराई नहीं लगती।
वाइफ को जमकर पेला पडोसी सेठ जी ने गहने के बहाने — यह सिर्फ एक घटना नहीं थी बल्कि हमारी जिंदगी का एक ऐसा मोड़ बन गई जिसने हमें एक नई दुनिया से मिला दिया। अब मैं अपनी पत्नी को सेठ जी के साथ चुदवाते हुए देखकर उत्तेजित होता हूँ और हमारी शादीशुदा जिंदगी में एक नया रोमांच आ गया है। सेठ जी अब हमारे घर के ही सदस्य बन गए हैं और हमारे बीच कोई बंदिश नहीं है। यही हमारी अन्तर्वासना है और हम इसे खुलकर जी रहे हैं।